राहु

राहु ग्रह, कुंडली में स्थित 12 भावों पर विभिन्न तरह से प्रभाव डालता है। इन प्रभावों का असर हमारे प्रत्यक्ष जीवन पर पड़ता है। ज्योतिष में राहु एक क्रूर ग्रह है, परंतु यदि राहु कुंडली में मजबूत होता है तो जातकों को इसके अच्छे परिणाम मिलते हैं जबकि कमज़ोर होने पर यह अशुभ फल देता है। आइए विस्तार से जानते हैं राहु ग्रह के विभिन्न भावों पर किस तरह का प्रभाव पड़ता है –

ज्योतिष में राहु ग्रह का महत्व

ज्योतिष में राहु ग्रह को एक पापी ग्रह माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में राहु ग्रह को कठोर वाणी, जुआ, यात्राएँ, चोरी, दुष्ट कर्म, त्वचा के रोग, धार्मिक यात्राएँ आदि का कारक कहते हैं। जिस व्यक्ति की जन्म पत्रिका में राहु अशुभ स्थान पर बैठा हो, अथवा पीड़ित हो तो यह जातक को इसके नकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। ज्योतिष में राहु ग्रह को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। लेकिन मिथुनराशि में यह उच्च होता है और धनु राशि में यह नीच भाव में होता है।

27 नक्षत्रों में राहु आद्रा, स्वाति और शतभिषा नक्षत्रों का स्वामी है। ज्योतिष में राहु ग्रह को एक छाया ग्रह कहा जाता है। दरअसल, सूर्यऔर पृथ्वी के बीच जब चंद्रमा आता है और चंद्रमा का मुख सूर्य की तरफ होता है तो पृथ्वी पर पड़ने वाली चंद्रमा की छाया राहु ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है।

राहु काल

हिन्दू पंचांग के अनुसार, राहु ग्रह के प्रभाव से दिन में एक अशुभ समयावधि होती है जिसमें शुभ कार्यों को करना वर्जित माना गया है। इस अवधि को राहु काल कहते हैं। यह अवधि लगभग डेढ़ घण्टे की होती है तथा स्थान एवं तिथि के अनुसार इसमें अंतर देखने को मिलता है।

ज्योतिष के अनुसार, राहु ग्रह का मनुष्य जीवन पर प्रभाव

शारीरिक रचना एवं स्वभाव – वैदिक ज्योतिष के अनुसार जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में स्थित लग्न भाव में राहु होता है वह व्यक्ति सुंदर और आकृषक व्यक्तित्व वाला होता है। व्यक्ति साहसिक कार्यों से पीछे नहीं हटता है। लग्न का राहु व्यक्ति को समाज में प्रभावशाली बनाता है। हालाँकि इसके प्रभाव बहुत हद तक लग्न में स्थित राशि पर निर्भर करता है। हालाँकि ज्योतिष के अनुसार ऐसा माना जाता है कि लग्न का राहु व्यक्ति के वैवाहिक जीवन के लिए अनुकूल नहीं होता है।

बली राहु – ज्योतिष में राहु ग्रह को लेकर ऐसा कहा जाता है कि यदि राहु किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में शुभ हो तो वह उसकी किस्मत चमका सकता है। कुंडली में मजबूत राहु व्यक्ति को प्रखर बुद्धि का बनाता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति अपने धर्म का पालन करता है और समाज में उसे मान-सम्मान और यश प्राप्त होती है।

पीड़ित राहु – कुंडली यदि राहु पीड़ित हो तो जातक को इसके नकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। यह जातक के अंदर बुरी आदतों को पैदा करता है। पीड़ित राहु के प्रभाव से जातक छल, कपट और धोखा करता है। व्यक्ति मांस, शराब तथा अन्य मादक पदार्थों का सेवन करता है। पीड़ित राहु व्यक्ति को अधर्मी बनाता है। इसके प्रभाव में आकर जातक दूसरों को परेशान करता है। यदि ऐसा हो तो जातकों को राहु से संबंधित उपाय करने चाहिए। ज्योतिष में राहु ग्रह की शांति के उपाय बताए गए हैं।

राहु ग्रह शांति, मंत्र एवं उपाय

वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु ग्रह एक क्रूर ग्रह है। कुंडली में राहु दोष होने से मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान, तालमेल की कमी होने लगती है। किसी समय विशेष पर हर कोई ग्रह अशुभ प्रभाव देने लगता है। ऐसी स्थिति में ग्रह शांति के लिए उपाय किये जाते हैं। राहु ग्रह शांति के लिए कई उपाय बताये गये हैं। इनमें राहु से संबंधित वस्तु का दान, रत्न, राहु यंत्र, राहु मंत्र और जड़ी धारण करना प्रमुख उपाय हैं। ऐसी मान्यता है कि राहु के शुभ प्रभाव से व्यक्ति रातों रात रंक से राजा बन जाता है, वहीं अशुभ फल मिलने से राजा से रंक बन जाता है। यदि आपकी कुंडली में राहु कमजोर है तो राहु ग्रह शांति के लिए इन उपायों को अवश्य करें। क्योंकि इन कार्यों के प्रभाव से राहु शुभ फल प्रदान करेगा और आपके कष्टों में कमी आने लगेगी।

वेश-भूषा एवं जीवन शैली से जुड़े राहु ग्रह शांति के उपाय

राहु  ग्रह शांति के लिये उपाय

नीले रंग के कपड़े पहनें।
अपने ससुर, नाना-नानी एवं मरीज़ लोगों का सम्मान करें।
शराब एवं मांस का सेवन न करें।
कुत्तों की देखभाल करें।

विशेषतः सुबह किये जाने वाले राहु ग्रह के उपाय

माँ दुर्गा की पूजा करें।
वराह देव की आराधना करें।
भैरव देव की पूजा करें।
दुर्गा चालिसा का पाठ करें।

राहु शांति के लिये दान करें

राहु की अशुभ दशा से बचने के लिये राहु ग्रह से संबंधित वस्तुओं को बुधवार के दिन राहु के नक्षत्र (आर्द्र, स्वाति, शतभिषा) में शाम और रात में दान करें।

दान करने वाली वस्तुएँ- जौ, सरसो, सिक्का, सात प्रकार के अनाज (जौ, तिल, चावल, साबूत मूंग, कंगुनी, चना, गेहूँ ), गोमेद रत्न, नीले अथवा भूरें रंग के कपड़े, कांच निर्मित वस्तुएँ आदि।

राहु के लिए रत्न

राहु के लिए गोमेद रत्न है। इस रत्न को धारण करने से जातकों को राहु दोष से मुक्ति मिलती है तथा जातक को बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।

राहु यंत्र

जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह, वैभव वृद्धि, अचानक आने वाली बाधाओं और बीमारियों से बचने के लिए राहु यंत्र का पूजन करें। राहु यंत्र को बुधवार के दिन राहु के नक्षत्र में धारण करें।

राहु ग्रह के लिये जड़ी

राहु ग्रह के दुष्प्रभाव से बचने के लिए बुधवार के दिन नागरमोथा की जड़ को राहु के नक्षत्र के दौरान धारण करें।

राहु के लिये रुद्राक्ष

राहु दोष निवारण के लिए 8 मुखी रुद्राक्ष धारण करना लाभदायक होता है।
आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने हेतु मंत्र:
ॐ हूं नमः।
ॐ ह्रां ग्रीं लुं श्री।।

राहु मंत्र

राहु महादशा निवारण के लिए राहु बीज मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। मंत्र – ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः!

राहु मंत्र का 18000 बार जाप करें जबकि देश-काल-पात्र पद्धति के अनुसार कलयुग में इस मंत्र को अधिकतम 72000 बार जपना चाहिए।

आप इस मंत्र का भी जाप कर सकते हैं – ॐ रां राहवे नमः!

राहु ग्रह शांति के उपाय करने से जातकों को राहु दोष से मुक्ति मिलती है। राहु एक छाया ग्रह है, जिसका कोई भौतिक रूप नहीं है। हिन्दू शास्त्रो के अनुसार राहु ग्रह भगवान भैरव देव का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु को एक पापी ग्रह माना गया है। इसके प्रभाव से जातकों को कई प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ता है। हालाँकि यह जातकों को शुभ और अशुभ दोनों ही परिणाम देता है। परंतु इसके अशुभ परिणामों से बचने के लिए राहु मंत्र का विधि अनुसार जाप करना चाहिए।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु और केतु के कारण कुंडली में काल सर्प दोष उत्पन्न होता है। इस दोष से बचने के लिए राहु शांति के उपाय कारगर हैं। राहु यंत्र की स्थापना तथा उसकी आराधना करने से जातकों को शिक्षा, व्यवसाय, कैरियर में आ रही परेशानियाँ दूर होती हैं। राहु दोष के उपाय छिपे हुए शत्रुओं, गुप्त रूप से आ रही बाधाओं, छल- कपट, गुप्त रोगों, सामाजिक असम्मान और भेदभाव से बचाता है।

हम यह आशा करते हैं कि राहु ग्रह शांति मंत्र एवं उपाय से संबंधित यह लेख आपके लिए लाभकारी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध होगा।

रोग – पीड़ित राहु के कारण व्यक्ति को शारीरिक समस्याएँ भी होती हैं। यह व्यक्ति के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसके कारण हिचकी, पागलपन, आँतों की समस्या, अल्सर, गैस्ट्रिक आदि समस्याएं होती हैं।

कार्य व व्यवसाय – कूटनीतिक कार्य, राजनीति, आखेट, क़ानून से सबंधित कार्य, सेवा, बुरे कर्म, चोरी, जादूगर, हिंसा आदि कार्यों को ज्योतिष में राहु ग्रह के द्वारा दर्शाया जाता है।

उत्पाद – मांस, शराब, गुटका, तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट एवं अन्य मादक पदार्थ ज्योतिष में राहु ग्रह के द्वारा दर्शाए जाते हैं।

स्थान – शराब की दुकान, जुए का अड्डा, कूड़े का ढेर आदि स्थानों को ज्योतिष में राहु ग्रह के द्वारा दर्शाया जाता है।

पशु-पक्षी तथा जानवर – ज़हरीले जीव एवं काले अथवा भूरे रंग के पशु पक्षियों को राहु के द्वारा दर्शाया जाता है।

जड़ी – नागरमोथ की जड़।

रत्न – गोमेद।

रुद्राक्ष – आठ मुखी रुद्राक्ष।

यंत्र – राहु यंत्र।

रंग – गहरा नीला।

मंत्र –

राहु का वैदिक मंत्र 
ॐ कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृध: सखा। कया शचिष्ठया वृता।। 

राहु का तांत्रिक मंत्र 
ॐ रां राहवे नमः 

राहु का बीज मंत्र 
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः

धार्मिक दृष्टि से राहु ग्रह का महत्व

धार्मिक दृष्टि से राहु ग्रह का बडा़ महत्व है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब समुद्र मंथन से अमृत का कलश निकला तो अमृतपान के लिए देवताओं और असुरों के बीच झगड़ा होने लगा। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया और देवताओं और असुरों की दो अलग-अलग पंक्तियों में बिठाया। असुर मोहिनी की सुंदर काया के मोह में आकर सबकुछ भूल गए और उधर, मोहिनी चालाकी से देवताओं को अमृतपान कराने लगी।

इस बीच स्वर्भानु नामक असुर वेश बदलकर देवताओं की पंक्ति में आकर बैठ गया और अमृत के घूँट पीने लगा। तभी सूर्य एवं चंद्रमा ने भगवान विष्णु को उसके राक्षस होने के बारे में बताया। इस पर विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया और वह दो भागों में बँट गया, ज्योतिष में ये दो भाग राहु (सिर) और केतु (धड़) नामक ग्रह से जाने जाते हैं।

इस प्रकार आप समझ सकते हैं कि धार्मिक दृष्टि के साथ साथ ज्योतिष में राहु ग्रह का महत्व कितना व्यापक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में स्थित 12 भाव उसके संपूर्ण जीवन को दर्शाते हैं और जब उन पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है तो व्यक्ति के जीवन में उसका असर भी दिखाई देता है।

आशा करते हैं कि वैभव जानी – शास्त्रीजी द्वारा दी गयी जानकारी आपको समझने में मददगार सिद्ध होगी।

Vaibhav Jani – Shastriji

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